श्रावण मास (सावन) की शुरुआत होने वाली है और यदि आप भी बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर (Deoghar) की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह एक बेहद पवित्र और यादगार अनुभव होने वाला है। देवघर भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां भगवान शिव का द्वादश ज्योतिर्लिंग (12 ज्योतिर्लिंगों में से एक) स्थापित है।
आपकी यात्रा को आसान और सुव्यवस्थित बनाने के लिए यहां एक कंप्लीट टूर गाइड दी गई है:
प्रमुख दर्शनीय स्थल (Places to Visit)
बाबा बैद्यनाथ मंदिर: यह यहां का मुख्य आकर्षण है। इसी परिसर में माता पार्वती का भी मंदिर है, जो एक शक्तिपीठ है। दोनों मंदिरों के शिखरों को एक लाल गठबंधन से जोड़ा गया है, जो बेहद पवित्र माना जाता है।
बासुकीनाथ मंदिर: देवघर से लगभग 43 किमी दूर स्थित है। ऐसी मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन तब तक पूरे नहीं माने जाते जब तक आप बासुकीनाथ के दर्शन नहीं कर लेते।
त्रिकूट पर्वत: देवघर से 21 किमी दूर, यह तीन चोटियों वाला एक खूबसूरत पर्वत है। यहां ट्रेकिंग और प्रकृति का आनंद लिया जा सकता है।
तपोवन: यह एक शांत गुफा स्थल है जहां माना जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने तपस्या की थी।
नौलखा मंदिर: बाबा मंदिर से थोड़ी दूरी पर स्थित यह राधा-कृष्ण का एक बेहद खूबसूरत मंदिर है, जिसके निर्माण में उस समय (1940 के दशक में) 9 लाख रुपये की लागत आई थी।
देवघर कैसे पहुंचें? (How to Reach)
हवाई मार्ग (By Air): देवघर में अपना खुद का एयरपोर्ट (Deoghar Airport - DGH) है, जो दिल्ली, कोलकाता और रांची जैसे प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
रेल मार्ग (By Train): मुख्य रेलवे स्टेशन जसडीह जंक्शन (JSME) है, जो देवघर से मात्र 7-8 किमी दूर है। यह हावड़ा-दिल्ली मुख्य लाइन पर स्थित है, इसलिए यहां के लिए देश के हर बड़े हिस्से से ट्रेनें मिल जाती हैं।
सड़क मार्ग (By Road): देवघर, रांची (250 किमी) और पटना (230 किमी) से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
यात्रा का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
अक्टूबर से मार्च: यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं और मौसम का आनंद लेना चाहते हैं, तो सर्दियों का समय सबसे बेस्ट है।
श्रावण मास (जुलाई-अगस्त): यदि आप 'विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला' देखना चाहते हैं, तो सावन के महीने में आएं। इस समय लाखों 'कांवरिया' सुल्तानगंज (बिहार) से गंगाजल लेकर 105 किमी पैदल यात्रा करके बाबा को जल चढ़ाने आते हैं। *ध्यान दें: इस समय बहुत भारी भीड़ होती है।*
रहने और खाने की व्यवस्था (Stay & Food)
रुकने के लिए: बाबा मंदिर के पास कई धर्मशालाएं, बजट होटल और होटल उपलब्ध हैं। सावन के महीने में आने से पहले एडवांस बुकिंग जरूर करा लें।
भोजन: देवघर में शुद्ध शाकाहारी भोजन आसानी से मिल जाता है। यहां का "पेड़ा" (Deoghar Peda) विश्व प्रसिद्ध है, जिसे बाबा के प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है।
> यात्रा के लिए विशेष टिप: यदि आप सावन या किसी त्योहार के दौरान आ रहे हैं, तो बाबा मंदिर में जल चढ़ाने के लिए लंबी कतारों से बचने के लिए आप 'शीघ्रदर्शनम' (VIP पास्स) टिकट भी ले सकते हैं, जो मंदिर प्रशासन द्वारा काउंटर या ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाता है।
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